2 C
New York City
January 19, 2020
Spiritual/धर्म

सिन्दूर का महत्व

Spiritual/धर्म( भारतीय नारी और सिंदूर का रिश्‍ता अटूट है। सुहाग की निशानी के रूप में उत्‍तर भारतीय महिलाएं सिंदूर को अपनी मांग में धारण करती हैं। दक्षिण भारत विवाहित महिलाओं में ऐसी परंपरा नहीं है। नारी के लिए सिंदूर बड़ा गहना होता और इसका संबंध पूरी तरह से पति से होता है। सिंदूर को शादीशुदा महिलाओं के लिए सौभाग्‍य का चिह्न माना जाता है। ज्‍योतिषी पं.शिवकुमार शर्मा से जानिए सिंदूर क्‍यों लगाया जाता है।माना जाता है कि पति की लंबी उम्र की कामना के लिए सिंदूर लगाया जाता है। शादी में फेरों के वक्‍त पति स्‍वयं अपने हाथ से पत्नी की मांग में सिंदूर भरता है। इसके बाद महिला तब तक माथे में सिंदूर भरती है जब तक वह सुहागिन रहती है। सिंदूर को पति की उम्र के साथ जोड़ा जाता है। पौराणिक मान्यताओं में लाल रंग से सती और पार्वती की उर्जा को व्यक्त किया गया है। सती को हिंदू समाज में एक आदर्श पत्नी के रूप में जाना जाता है जो अपने धर्म, अपनी शक्ति के दम पर भगवान से भी अपने वचन मनवाने की शक्ति रखती है। मान्यता यह भी है कि सिंदूर लगाने से मां पार्वती महिलाओं को अखंड सौभाग्यशाली होने का आशीर्वाद देती हैं।
सिंदूर लगाने के पीछे वैज्ञानिक कारण भी हैं। सिंदूर बनाने में अक्सर हल्दी, चंदन और हर्बल रंगो का इस्तेमाल किया जाता है। ऐसा माना जाता है कि सिंदूर धारण करने से दिमाग शांत रहता है और घर में सुख-शांति रहती है।
सिंदूर लगाने से ब्‍लड प्रेशर नियंत्रित रहता है। सिंदूर महिलाओं में काम भावना को जाग्रत करने में भी प्रेरक का काम करता है।

Related posts

शुक्ल पक्ष एकादशी

GIL TV News

मणिकर्ण नामक पवित्र तीर्थ

GIL TV News

भगवान पार्श्वनाथ

GIL TV News

Leave a Comment